शीतला माता मंदिर, रणोदर - शीतला सप्तमी मेला 2025

शीतला माता मंदिर, रणोदर (Sheetla Mata Mandir, Ranodhar) में शीतला सप्तमी मेला 2025 इस वर्ष 21 मार्च 2025, शुक्रवार को आयोजित होगा। इस अवसर पर जिला कलेक्टर, जालोर ने सांचौर सहित पूरे जिले में स्थानीय अवकाश घोषित किया है, ताकि भक्तगण माता के दरबार में आकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकें।

शीतला माता मंदिर, चारणीम, रणोदर - शीतला सप्तमी मेला 2025
शीतला माता - शीतला माता मंदिर,रणोदर


शीतला माता मंदिर, रणोदर (Sheetla Mata Mandir, Ranodhar) राजस्थान के जालोर जिले के सांचौर उपखंड में स्थित एक पवित्र धाम है, जो चर्म रोगों के निवारण के लिए प्रसिद्ध है। यह चमत्कारी मंदिर सांचौर से लगभग 32 कि.मी. दूर उत्तर दिशा चितलवाना तहसील के रणोदर (चारणीम) गांव में स्थित है। यहाँ हर वर्ष चैत्र शुक्ल सप्तमी (बास्योड़ा पर्व) पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं।

शीतला माता मंदिर, रणोदर का इतिहास और श्रद्धा

शीतला माता मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। माता शीतला को त्वचा रोगों, विशेषकर चेचक जैसी बीमारियों की देवी माना जाता है, विशेष रूप से चेचक और अन्य चर्म रोगों के निवारण के लिए माता का आशीर्वाद लिया जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु चर्म रोगों से मुक्ति, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि माता के दरबार में माथा टेकने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ग्रामीणों की पारंपरिक मान्यता के अनुसार, यदि किसी बच्चे को माता (चेचक) निकलती है, तो उसके ठीक होने के बाद माता के मंदिर में धोक लगाना अनिवार्य माना जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी लोग इसे पूरी श्रद्धा से निभाते हैं।

बास्योड़ा पर्व और चैत्र शुक्ल सप्तमी का मेला

प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल सप्तमी, जिसे स्थानीय भाषा में "बास्योड़ा" कहा जाता है, पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है।  इस दिन शीतला माता का विशेष पूजन और विशेष अनुष्ठान होते हैं, और बड़ी संख्या में श्रद्धालु हलवा-पूरी और ठंडे प्रसाद का भोग लगाकर माता को प्रसन्न करते हैं। इस दिन गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर माता के दरबार में उपस्थित होते हैं। मेले का माहौल आस्था और उत्साह से भरा होता है। श्रद्धालु माता की आराधना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे श्रद्धालु, विभिन्न धार्मिक क्रियाकलाप, भजन-कीर्तन, और मेले का आनंद लेते हैं।

रणोदर गांव के सरपंच प्रतिनिधि श्री सुरजन राम बिश्नोई ने मेले की व्यवस्था और तैयारियों को लेकर कहा कि, "हम पूरी तरह से तैयार हैं और सभी श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक एवं सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। माता के दरबार में आने वाले भक्तों की सुविधा हमारी प्राथमिकता है।" 

बच्चों की धोक की परंपरा

इस मंदिर की एक अनोखी परंपरा है बच्चों की धोक। जब बच्चों में माता निकलती है, यानी चेचक जैसी बीमारी होती है, तो उन्हें माता के मंदिर में धोक लगवाई जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी लोग इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

मंदिर कैसे पहुंचे?

शीतला माता मंदिर, रणोदर (Sheetla Mata Mandir, Ranodhar) का यह धाम सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था और आरोग्य का केंद्र भी है। यह मंदिर न केवल राजस्थान, बल्कि गुजरात और अन्य राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

यदि आप भी माता की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस मंदिर के दर्शन अवश्य करें। माता शीतला सभी भक्तों को आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें!

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